🌟 दादाभाई नौरोजी: जीवन परिचय
- जन्म: 4 सितम्बर 1825 (बॉम्बे, वर्तमान मुंबई)
- मृत्यु: 30 जून 1917 (लंदन, इंग्लैंड)
- पिता: नुसेरवानजी नौरोजी
- माता: मंजीबाई
- उपनाम: Grand Old Man of India (भारत का ग्रैंड ओल्ड मैन)
🏷️ दादाभाई नौरोजी: शिक्षा और प्रारंभिक जीवन
- उन्होंने बॉम्बे के एलफिन्स्टन कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की।
- गुजरात के प्रख्यात शिक्षाविद एवं समाज सुधारक दादाभाई नौरोजी से प्रेरित थे।
- वे एक सफल व्यापारी, अर्थशास्त्री और राजनीतिक विचारक थे।
📢 दादाभाई नौरोजी: राजनीतिक एवं सामाजिक योगदान
- 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के स्थापना सदस्यों में से एक।
- कांग्रेस के 3 बार अध्यक्ष (1886, 1893, 1906)
- भारत में स्वशासन (Home Rule) के प्रबल समर्थक।
- भारतीयों के लिए सिविल सेवा में समान अवसर की मांग की।
- ब्रिटिश सरकार की आर्थिक नीतियों की आलोचना की।
📚 दादाभाई नौरोजी: प्रमुख पुस्तकें
Poverty and Un-British Rule in India
भारत में गरीबी और ब्रिटिश शासन का अन्याय
The Economic Drain of India
भारत से धन की निकासी
📝 दादाभाई नौरोजी: महत्वपूर्ण तथ्य (Exam Special)
- इन्हें "भारतीय अर्थशास्त्र के जनक" भी कहा जाता है।
- दादाभाई नौरोजी ने "ड्रेन थ्योरी" दी, जिसमें उन्होंने बताया कि भारत की संपत्ति ब्रिटेन जा रही है।
- 1889 में "लंदन इंडियन सोसाइटी" की स्थापना की।
- पहले भारतीय थे, जिन्हें ब्रिटिश संसद (House of Commons) में सदस्य बनने का अवसर मिला (1892)।
⭐ दादाभाई नौरोजी: याद रखने योग्य बातें
⚡ Quick Revision: दादाभाई नौरोजी
- दादाभाई नौरोजी = कांग्रेस नेता + अर्थशास्त्री + ड्रेन थ्योरी + स्वशासन के समर्थक + पहले भारतीय (ब्रिटिश संसद)।
✨ निष्कर्ष: दादाभाई नौरोजी
दादाभाई नौरोजी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान नेता, अर्थशास्त्री और "भारत के ग्रैंड ओल्ड मैन" थे। उन्होंने "ड्रेन थ्योरी" के माध्यम से ब्रिटिश शासन की आर्थिक शोषण नीति का पर्दाफाश किया। वे भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक सदस्यों में से एक थे और तीन बार कांग्रेस के अध्यक्ष बने। ब्रिटिश संसद में पहले भारतीय सदस्य के रूप में उन्होंने भारत की आवाज़ को बुलंद किया। उनका जीवन प्रत्येक प्रतियोगी परीक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।